Friday, November 14, 2025

हाँ मेरी माँ तो ऐसी है।

 चौखट के सहारे खड़ी ताकती
पलकें बिछाए करती मेरा इंतज़ार
हाँ मेरी माँ तो ऐसी है।  

परेशान नहीं दिखती, पर परवाह वो करती
देख मेरा चेहरा ,वो चहकती हर बार
हाँ मेरी माँ तो ऐसी है। 

रूठ मैं जाऊँ और खाना ना खाऊँ
वो नहीं रूठती, और  मनाती मुझे बारम्बार
हाँ मेरी माँ तो ऐसी है। 

दुख सुख के पल, मैं साँझा जो करती
आँखें नम कर, हर पल आंसूँ बहने को तैयार
हाँ मेरी माँ तो ऐसी है। 

गोद में उठाकर मुझको और मेरा बस्ता
चूमती मेरा माथा, प्यार में मेरे जाये बलिहार 
सबसे बचकर करती रास्ता पार
हाँ मेरी माँ तो ऐसी है। 

घर पहुँच कर, झठ किचन में जाती 
गर्मागर्म खाना खिलाती, कभी न दिया उसने अचार 
हाँ मेरी माँ तो ऐसी है। 

नाच स्पर्धा में लगा मोहल्ला
सजा धजा कर ,गुड़िया बना ,ले जाती कर तैयार
हाँ मेरी माँ तो ऐसी है

जब गुस्से में , कभी वो आती
कर देती बोलना बंद, और मैं घूमूँ लाचार
हाँ मेरी माँ तो ऐसी है

ब्रह्मांड जितना बड़ा दिल वो रखती
लगते सब प्यारे, कोई ना लगता उसे बेकार
हाँ मेरी माँ ऐसी ही है

मेरी छोटी जीत को गाती
हार को कैसे वो पी जाती, फिर ना लेती कोई डकार
हाँ मेरी माँ तो ऐसी है

कभी जो बिखरी मेरी दुनिया
धर रूप माँ दुर्गा का, टकराने को खड़ी तैयार
हाँ मेरी माँ तो ऐसी है

बालों में तेल लगाना, फिर हलके से सहलाना
करती हूँ मैं याद, आज सात समंदर पार
हाँ मेरी माँ तो ऐसी है

मेरे लिए शॉपिंग करते नहीं थकती 
मना करू तो , निकाले आँसुओं के हथियार
हाँ मेरी माँ तो ऐसी है

मेरे जाते ही, फिर एक सूटकेस निकलता
 भरने उसको झटपट लगती, कितना  करती है मुझसे प्यार
हाँ मेरी माँ तो ऐसी है



Wednesday, November 5, 2025

हाँ दोस्तों में कुछ तो बात होती है

 जहाँ समय का होश ना रहे।  

बातों का सिलसिला कुछ इस तरह चले । 

जाम बने या चाय बने   

जम गई टोली, अब कोई ना टले ।  

हाँ दोस्तों में कुछ तो बात होती है !


कोई अपना गीत गुनगुनाता ।  (guess)

कोई रखता शायरी का रूबाब ।  (guess)

थिरकते मोर जैसा, मेरा एक दोस्त ।  (guess)

हर दोस्त मेरा, महख़ाने की सबसे महँगी शराब ।  

हाँ दोस्तों में कुछ तो बात होती है !


जिस्म बहुत है,

पर दो से धड़कता दिल इस दल का ।  (guess २ names )

खीर खिलाके ,कोई चाय पिलाके ।  (guess)

कॉफ़ी की कशिश से करे कोई मुझे हल्का ।  (guess)

हाँ दोस्तों में कुछ तो बात होती है !


हँसी किसी की,जैसे झील का पानी ।  (guess)

बोले कोई ,नदी सी बानी ।  (guess)

हर दोस्त अजूबा, बड़ा अचंभा ।  

शुक्र खुदा का यहाँ कोई ना ज्ञानी ।  

हाँ दोस्तों में कुछ तो बात होती है !


हँसी ठिठोली ,भर दें हर कोना ।  (guess )

ख़ुशी ना सिमटे ,तो पड़े है रोना ।  

रईसों को मैं अब रास ना आती ।  

मेरे दोस्त है बहुत, और सब है सोना ।  

हाँ दोस्तों में कुछ तो बात होती है !


जहाँ घड़ी को आराम  नहीं ।  

बातों को भी पूर्णविराम नहीं ।   

चाय पे चर्चा, होती सबकी 

बचे ना कोई ,जिसकी खिंचे टाँग नहीं ।  

हाँ दोस्तों में कुछ तो बात होती है!


समय का होश हम मदहोशों को कहाँ ।  

चार भी बैठ जायें ,जिस किसी के यहाँ ।  

बातों का सिलसिला रुकते ना बनता ।  

सैलाब में बह जाये, फिर चाहे दुनिया जहाँ 

हाँ दोस्तों में कुछ तो बात होती है !


Monday, September 8, 2025

Remember always- for nimai

 Remember Always


O dear son,

 Remember always to keep your interests—--------

they will give you 

The best company in worst times


O dear son,

Remember always to keep your determination—--------

it will give you

Force to touch dreams


O dear son,

Remember always to keep your focus—--------

it will help you

Shut down noises


O dear son,

Remember always to keep your outlook positive—--------

it will help you

Overcome obstacles


O dear son,

Remember always to keep your confidence—--------

it will give you

Courage to grab opportunities


O dear son,

Remember always to keep your sensitivity—--------

it will help you

Connect with humans


O dear son,

Remember always to keep your family closer—--------

they will give you

Unconditional support


O dear son,

Remember always to keep your expressions with greeting cards—--------

they will get you

True friendships and relations


Sunday, January 19, 2025

एक कप चाय बना दो

एक कप चाय बना दो 


अच्छा गया, बुरा गया 

बीता पल दिन में फिर समा गया 

रात बैठा, मैं जब अपनों के साथ 

तो तलब लगी और माँग लिया 

अरे कोई एक कप चाय बना दो 


बहुत रो रहा एक गली-मुहल्ला 

वहाँ लोगों का बाज़ार लगा 

शायद कहीं कोई गुज़र गया 

अफ़सोस जताने हर कोई आ रहा 

अरे कोई एक कप चाय बना दो 


सैर सुबह की करने मैं चला 

सामने मेरा दोस्त मिला 

सैर सपाटा छोड़ वहीं पर 

घर चल, बातों का सिलसिला चला  

अरे कोई एक कप चाय बना दो 


कर बुराई, कर लड़ाई 

जब मन का भार कुछ हल्का हुआ 

माँग ली अपनों से माफ़ी 

माफ कर गैरों का अपना हुआ   

अरे कोई एक कप चाय बना दो 


देश से अपने दूर हो गया 

कॉफ़ी पीना जब दस्तूर हो गया 

छोड़ के सारी शर्मोहया 

दफ़्तर में एक दिन ऐलान किया 

अरे कोई एक कप चाय बना दो 


मौसम के रंग होते कितने 

पर अच्छी चाय का एक रंग होता 

बारिश में पकौड़े के साथ  

काँपते होंठ बोले एक सर्दी की रात 

अरे कोई एक कप चाय बना दो