लेखिका
भोगो भाग
वो बातें खुद-से, वो अनदेखे ख़्वाब
पेश करती हूँ इस महफ़िल में, मैं खुद को जनाब
तुम कोशिश न करना समझने की मुझको
बस पढ़ लेना, मेरी ज़िन्दगी की किताब
सबसे पहले, मैं उन सभी पाठकों का आभार व्यक्त करती हूँ, जिन्होंने मेरी कविताओं को पढ़ा, सराहा और मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
मेरे परिवार, जिन्होंने हर कदम पर मेरा साथ दिया और मेरे सपनों को साकार करने के लिए हमेशा मेरा हौसला बढ़ाया, उनका मैं तहे दिल से धन्यवाद करती हूँ।
मेरे मित्र, जिन्होंने मेरी हर कविता पर ईमानदार सुझाव दिए और मेरे लेखन को निखारने में मदद की, उनके प्रति मैं बेहद कृतज्ञ हूँ।
उन गुरुओं और साहित्य प्रेमियों का भी आभार, जिन्होंने मुझे शब्दों की ताकत और कविताओं की गहराई समझाई।
अंततः, मैं उन अनदेखे पलों और भावनाओं का धन्यवाद करती हूँ, जिन्होंने मुझे शब्दों के इस जादू से जोड़ दिया।
यह पुस्तक आप सभी के सहयोग और विश्वास की प्रतीक है। आपके बिना यह सफर अधूरा होता।
देखो उस पेड़ को कितना शर्माया हुआ है