Wednesday, July 31, 2024

hindi long poems

 तुम भरी भरी बूँद बारिश की

मैं सूखी तपती ज़मीन ख्वाहिशों की

तुम ऊंचे शिखर वाला पर्वत अकेला
मैं रात में खिलने वाली कोमल बेला

तुम सागर में आयी ऊँची ऊँची लहरे बेहिसाब
मैं झील का सिकुड़ा शांत पानी हूँ जनाब

तुम देवों के देव महादेव के अनुयायी
मैं जनमी हूँ बर्फ़ानी बाबा बनके तेरी परछाईं