तुम भरी भरी बूँद बारिश की
मैं सूखी तपती ज़मीन ख्वाहिशों की
तुम ऊंचे शिखर वाला पर्वत अकेला
मैं रात में खिलने वाली कोमल बेला
तुम सागर में आयी ऊँची ऊँची लहरे बेहिसाब
मैं झील का सिकुड़ा शांत पानी हूँ जनाब
तुम देवों के देव महादेव के अनुयायी
मैं जनमी हूँ बर्फ़ानी बाबा बनके तेरी परछाईं