तू ख़्याल तो नहीं
चमकते तारो सा दूर दूर तू रहता है -२
छूने की चाह में मेने खुद को जलाया है कई बार
तू कहीं मेरा कोई ख़्याल तो नहीं
चाहा था तुझे बड़ी शिद्दत से पाना -२
खुदा समझ ना पाया और खुद उतर आया
तू कहीं ………........
क़रीब इतने ना थे, कभी हम अपने आपसे-२
तूने मुझसे मुझे मिलवाया
तू कहीं….............
हसरतें बहती मेरी आवारा नदी जैसे-२
मुझे मेरे सागर से जा मिलाया
तू कहीं …...........….
मेरे बेचैनियों के बवंडर में गोते तूने कितने खाए-२
मेरी डूबती कश्ती को किनारे लगाया
तू कहीं ……….........
ये रूहों के रिश्तों को समझ नहीं पाई मेरी चंचल जवानी -२
मुहब्बत से इश्क़ का सफ़र तय तूने कराया !
तू कहीं ……............
Aarushi