Thursday, October 20, 2022

कैसे


कैसे 

मन के दीपक में जगमगाती लौ जैसा ये प्रेम 
तुझमें प्रेम की अग्नि, जलाऊँ मैं कैसे  

रात की कालिख पुछ गयी हो जिस तन पर 
उस तन को फिर चमकाऊँ मैं कैसे

 ठंडी सिकुड़ती वो रातें, खट्टी-मीठी वो यादें
 यादों को अपनी सुलाऊँ मैं कैसे 

वो मेरा सजना -संवरना, वो तेरी हलकी सी नाराजगी 
अब देखे ना वो मुझको, उसे रिझाऊँ मैं कैसे 

मेरे मन के भंवर में फंसी अपनी प्रेम की नइया 
तुझ डूबते को किनारा दिखाऊं मैं कैसे